फैजाबाद में खूब खिला कमल





mainpuri hara to de dunga jan

 

फैजाबाद के चुनाव के नतीजो को लेकर किया गया Truthstoday का अनुमान एकदम सटीक बैठा है | फ़ैजाबाद की  गोसाईगंज विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी इंद्र प्रताप तिवारी खब्बू ने सपा के विधायक अभय सिंह को 11000 से अधिक मतों से दी शिकश्त दी है जिसके बाद भाजपा समर्थक ख़ुशी से खूब झूमे |

बीकापुर से भाजपा की शोभा सिंह विजयी

फ़ैजाबाद । बीकापुर विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी शोभा सिंह विजयी,सपा के विधायक आनंदसेन यादव को लगभग 17000 मतों से दी शिकश्त, समर्थकों में ख़ुशी की लहर है |
अयोध्या विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी वेद प्रकाश गुप्ता ने सपा के प्रत्याशी तेजनारायण पांडेय को 50000 से अधिक  रिकॉर्ड मतों से हराया।

रुदौली विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी राम चंद्र यादव ने सपा के प्रत्याशी अब्बास अली जैदी को 31 से अधिक  रिकॉर्ड मतों से हराया।

मिल्कीपुर से भाजपा जीती भाजपा प्रत्याशी बाबा गोरखनाथ 28000  से अधिक मतों से सपा प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को हराया है |

देखिए यह है Truthstoday का सर्वे




party symbol

 

अयोध्या -फैजाबाद में 2012 का विधानसभा चुनाव किसी वरदान की तरह रहा . जिसमे पूरी समाजवादी पा र्टी बम -बम हो गई . इस आंधी में वह अयोध्या सीट भी उड़ गई जिसपर 1991 से 2012 तक भारतीय जनता पार्टी का कब्जा रहा . लिहाजा अनुभवी भाजपा नेता लल्लू सिंह समाजवादी पार्टी प्रत्याशी कम अनुभवहीन और राजनीति के नए खिलाड़ी तेजनारायण पाण्डेय उर्फ़ पवन पाण्डेय से चुनाव हार गए … भाजपा को थोड़ी बहुत संतावना रुदौली विधानसभा से मिली थी जँहा भाजपा प्रत्याशी रामचंद्र यादव ने समाजवादी पार्टी प्रत्याशी रश्दी मियाँ से विपरीत हवा के बावजूद सीट छीन ली ..इस तरह फैजाबाद जिले में अयोध्या विधानसभा समेत चार सीटो पर समाजवादी पार्टी का कब्जा हो गया …
लेकिन 2017 में क्या होगा , कौन जीतेगा और किसकी झोली खाली रहेगी यह बड़ा सवाल है किसका जबाब पाने के लिए अब ;लंबा इन्तजार नहीं करना होगा . महज कुछ घंटे और इन्तजार ज़बाब सामने आंकड़ो की शक्ल ,में खडा दिखाई देगा . Truthstoday ने भी अयोध्या और फैजाबाद की विधानसभा का बारीकी से अध्ययन किया है और यह जानने की कोशिश की है कि कौन कंहा जीत का डंका बजा सकता है और कंहा आ सकता है अप्रत्याशित परिणाम ..




अयोध्या विधानसभा —

 

ayodhya candidates

 

सबसे पहले मुकाबले में कौन है इसपर एक निगाह डाल लीजिये …
अयोध्या—वेद प्रकाश गुप्ता (भाजपा )…..तेजनारायन पाण्डेय पूर्व वन राज्य मंत्री मौजूदा विधायक (सपा)….बज्मी सिद्दीकी== बसपा में त्रिकोणीय मुकाबला बताया जा रहा है …
भले ही तेजनारायण पाण्डेय उर्फ़ पवन पाण्डेय इस सीट से सिटिंग विधायक है लेकिन जनता की उम्मीदों के बोझ तले दबते हुए दिखाई दे रहे है . चुनाव के पहले तक सपा से जुड़े रहने वाले बंशीलाल यादव बीएमपी से तो सूर्यकांत पाण्डेय कम्युनिष्ट पार्टी से सामने खड़े ताल ठोक रहे है तो जातीय वोट भी नाराज रहे और अधिकतर भाजपा के खेमे में खड़े रहे , क्षत्रिय मतों की बात करे तो शुरू से न पवन पाण्डेय ने उसको करीब लाने की कोशिश की और न ही वह आया , पिछडो और अति पिछडो में मोदी का जादू काम कर गया तो यादव मतों को छोड़ कर कोई बड़ा जातीय समूह जुडा नहीं . यादव वोटो में भी सेंध लगा दी बंशी लाल यादव ने जिन्होंने न सिर्फ पवन [पाण्डेय का नुकसान किया बल्कि बहुजन मुक्ति पार्टी का उम्मीदवार होने के नाते बसपा को भी कुछ हद तक चोट पहुंचाई है हमारे सर्वे के अनुसार बंशी लाल 7 से 11 हजार के बीच वोट पा सकते है .वंही बसपा ने मुस्लिम प्रत्याशी खड़ा कर बड़ा दाव चला और वज्मी सिद्दीकी को अपना उम्मीदवार बनाया लेकिन उसका बहुत लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा है . मतदान के दिन जब बसपा का वोट बैंक समझे जाने वाले पासी , और कोरी वोट टूटकर भाजपा में जाने लगे तो मुस्लिम वापस समाजवादी पार्टी की तरफ लौटता दिखा जिसके चलते समाजवादी पार्टी को कुछ हद तक फायदा हुआ लेकिन इतना नहीं जो बिजय के द्वार पर पहुंचा सके . वंही मुस्लिम वोट सपा के खेमे में जाने की खबर ने बसपा प्रत्याशी का नुकसान ही किया एक तरफ जंहा मुस्लिम वोट बंट गया वंही परंपरागत बसपा वोट में भी बीजेपी ने सेंध लगा दी .. लिहाजा सपा और बसपा से दूर हुआ वोट सीधे भाजपा की झोली में जा गिरा . इसी के चलते पहले सपा और फिर बसपा से अयोध्या बिधानसभा प्रत्याशी के रूप में महज 30, 32 हजार वोट पाने वाले बेद प्रकाश गुप्ता इस बार जश्न मना सकते है और जीत का ताज उनके सिर पर सज सकता है .. क्योकि नए प्रत्याशी होने के नाते पवन पाण्डेय की तरह उनसे जनता ने काम के बारे में नहीं पूंछा है हालाकि लगभग 2 से 3 हजार वोटो का नुकसान उन्हें ब्यापारी नेता सुशील जायसवाल पहुंचा सकते है .. लेकिन बावजूद इसके अयोध्या सीट पर केसरिया झंडा फहराना तय लग रहा है ..




गोसाईगंज विधानसभा ..

 

 

यंहा से प्रत्याशी जो मुकाबले में है .. -बाहुबली अभय सिंह मौजूदा विधायक (सपा)…….बाहुबली इंद्र प्रताप तिवारी “खब्बू” भाजपा अपनादल गठबंधन प्रत्यासी…..धर्म राज निषाद में त्रिकोणीय मुकाबला….
2012 में इस सीट से अभय सिंह सपा प्रत्याशी के रूप में रिकार्ड मतों से जीते . हालाकि उस समय वह खुद जेल में थे और उनकी पत्नी सरिता सिंह ने चुनाव की कमान संभाली थी , लेकिन मंच से उनकी भावुक अपील ने सीधे जनता के दिल पर असर डाला था , दो और कारण रहे कि एक तो अभय सिंह के पिता की छवि जनता में बेहद उदार व्यक्तित्व के रूप में है तीसरा अभय सिंह ने अपनी विधानसभा क्षेत्र में ऐसा कुछ नहीं किया जो उनकी बाहुबली की छवि के अनुरूप हो . इसके बावजूद गोसाईगंज विधानसभा में ही नहीं पूरे फैजाबाद में उनकी छवि युवाओं में राविनहुड जैसी रही .. यही कारण रहे कि अभय सिंह कुछ अपनी कुछ अखिलेश लहर के सहारे माननीय बन गए थे . उस समय भी इंद्र प्रताप तिवारी उर्फ़ खब्बू तिवारी उनके सामने बसपा प्रत्याशी के रूप में थे , जो इस बार भाजपा प्रत्याशी के रुप में सामने खड़े है . लेकिन पहले जैसी अभय सिंह की राविनहुड वाली छवि भी कमजोर पडी है दूसरे सहानभूति की लहर भी नहीं है , तीसरे मोदी की लहर में किश्ती बचाना उनको भारी पड़ सकता है . वही पूर्व कैबिनेट मंत्री धर्म राज निषाद बसपा उम्मीदवार है लेकिन निषाद मतों की बहुलता के बावजूद उनकी जीत मुमकिन नहीं लगती . खुद अभय सिंह का कहना है कि इस बार उनकी जीत पहले जैसी नहीं होगी और जीत हार का अंतर कम होगा लेकिन जिस तरह भाजपा के पक्ष में लहर साफ़ दिखाई दे रही है और खब्बू ने जिस तरह चुनाव लड़ा है उससे सपा को यह सीट बचाना मुश्किल हो सकता है …




बीकापुर-विधानसभा ..

 

beekapur candidates

 

यंहा से प्रत्याशी जो मुकाबले में है .. शोभासिंह भाजपा …….सीटिंग विधायक आनंदसेन यादव सपा …… पूर्व बसपा विधायक जितेन्द्र सिंह “बबलू” बसपा त्रिकोणीय मुकाबला …
इस सीट को सपा की परम्परागत सीट भी कह सकते है , इस सीट से पहले अवधेश प्रसाद , फिर मित्रसेन यादव और उसके बाद आनंदसेन यादव लगातार जीतते रहे है .इस बार भी आनंद सेन सपा प्रत्याशी के रूप में सामने है . लेकिन इस बार भाजपा ने लगातार रालोद के लिए जमीन तैयार करने के लिए पहचान बनाने वाले जमीनी नेता मुन्ना सिंह चौहान की पत्नी को अपना उम्मीदवार बनाया है . मुन्ना सिंह की अभी हाल में ही डेंगू से मौत हो गई उस समय वह रालोद के प्रदेश अध्यक्ष थे . उनकी मौत के बाद उनकी पत्नी शोभा सिंह भाजपा में शामिल हुई तो पार्टी ने उन्हें अपना प्रत्याशी बना दिया . मुन्ना सिंह की मौत से उपजी सहानभूति की लहर अगर भाजपा की लहर की साथ मिल गई तो यंहा अप्रत्याशित नतीजे आ सकते है ..हालाकि इस सीट से सपा को बहुत उम्मीदे है . लेकिन सपा प्रत्याशी आनन्द सेन सबसे मजबूत स्थिति में होने के बावजूद उनको सीट बचाना मुश्किल हो सकता है .. हालाकि लगभग 1 सी 2 फीसदी यादव मतों को छोड़कर यादव पूरी तरह समाजवादी प्रत्याशी की साथ रहा है जबकि परंपरागत मुस्लिम मतदाता भी लगभग 60 फीसदी साथ रहे है जबकि कुछ बैकवर्ड , कुछ फारवर्ड और कुछ दलित वोटो में भी इनकी सेंधमारी रही है . जबकि बसपा प्रत्याशी जितेन्द्र सिंह बब्लू के परम्परागत मतों का बड़ा धडा भाजपा के साथ चला गया और मुस्लिम उतनी तादात में उनसे जुडा नहीं जितने की अपेक्षा थी वंही सजातीय क्षत्रिय मत उनसे छिटककर शोभा सिंह के खेमे में अधिक चले गए इसलिए उनका दावा कमजोर हुआ और वह तीसरे स्थान पर खिसक गए है …




मिल्कीपुर विधानसभा ..

 

Milkipur Seat

 

यंहा से प्रत्याशी जो मुकाबले में है .. -अवधेश प्रसाद सपा….. गोरखनाथ बाबा (युवा) भाजपा…..राम गोपाल बसपा त्रिकोणीय मुकाबला….
इस सीट पर सबसे चौकाने वाले परिणाम आ सकते है , पहली बार भाजपा ने इस सुरक्षित सीट से सपा के कैबिनेट मंत्री रहे अवधेश प्रसाद के खिलाफ कम अनुभवी लेकिन युवा गोरखनाथ बाबा को चुनाव मैदान में उतारा है . बाबा वास्तव में प्रापर्टी के बिजनेस से जुड़े है और युवा बड़ी संख्या में उनसे जुड़े है जिसका सीधा लाभ गोरखनाथ को मिलता दिखाई दे रहा है .वंही पहली बार किसी ने अवधेश प्रसाद को मजबूती से चुनौती दी है जिसके चलते अवधेश प्रसाद से नाराज घडा सीधे सीधे भाजपा प्रत्याशी से जुड़ गया है . एक और कारण रहा कि चुनाव से पहले की रात्रि को सपा प्रत्याशी की गाडी पर किसी ने पत्थर फेका जिसमे गाडी का शीशा फूट गया इस मामले जी लोगो को नामजद किया गया उसमे कई जातियों के युवक थे चूँकि सुबह चुनाव था लिहाजा इसका भी असर भाजपा प्रत्याशी के पक्ष में जाता दिखा , जबकि बसपा प्रत्याशी राम गोपाल ने भी मजबूती से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है लेकिन जीत के आंकड़े से काफी दूर रह गए लगते है … इस सीट से अगर भाजपा जीत दर्ज करती है और सपा के दिग्गज नेता अवधेश प्रसाद को हार का सामना करना पड़े तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए …




रुदौली विधानसभा —

 

Rudhauli candidates

 

यंहा से प्रत्याशी जो मुकाबले में है .. राम चन्दर यादव फैजाबाद के इकलौते भाजपा विधायक भाजपा……अब्बास अली जैदी उर्फ़ रुश्दी मिया सपा….फिरोज खान उर्फ़ गब्बर बसपा त्रिकोणीय मुकाबला….
इस सीट पर 2012 के विधानसभा चुनाव में अखिलेश लहर के बावजूद भाजपा प्रत्याशी रामचंद्र यादव ने जीत दर्ज कर चौका दिया था . इसका अभूत हद तक कारण सजातीय यादव मतों का सपा से दूर होकर भाजपा को वोटिंग करना रहा तो हिन्दू मतों की लाम बंदी भी रही जिसने सपा से यह सीट छीनकर भाजपा के खाते में डाल दिया था . इस बार सपा प्रत्याशी अब्बास अली जैदी उर्फ़ रुश्दी मिया के सामने बसपा ने अपने पूर्व घोषित प्रत्याशी सर्वजीत सिंह को हटाकर .फिरोज खान उर्फ़ गब्बर बसपा प्रत्याशी बनाया है . गब्बर के मजबूती से लड़ने के चलते यंहा मुकाबला त्रिकोणीय है , लेकिन गब्बर और रश्दी की लड़ाई में फिर से भाजपा प्रत्याशी रामचंद्र बाजी मार सकते है .. हालाकि रश्दी मियाँ शायद पहली बार खुद घर -घर गए है पत्नी और बच्चो ने भी प्रचार किया है लेकिन गब्बर ने जिस अंदाज में चुनाव लड़ा है उसने रश्दी मिया के सामने मुश्किल खडी कर दी है . भाजपा इस सीट को बचाने में फिर कामयाब हो सकती है .

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