क्या यही प्यार है , प्रेमी ने प्रेमिका संग चुनी मौत





ambedkarnagar suicide

कहते है इश्क में इंसान हद से गुजर जाता है | वह ऐसा कुछ कर जाता है जो सामान्य स्थिति में सोच भी नहीं सकता | इसलिए इश्क सबसे हिट और हॉट  सब्जेक्ट है | चाहे फिल्म हो या  टीवी सीरियल बिना इश्क के तड़का लगे वह हिट ही नहीं होता | इश्क को किसी ने पागलपन कहा तो किसी ने जूनून | इसी जुनून ने यूपी के अम्बेडकरनगर में एक युवक की जान ले ली तो उसका प्यार जिन्दगी से जद्दोजहद कर रहा है | जी हाँ अम्बेडकरनगर जिले में एक दूसरे के प्यार में पागल प्रेमी युगल ने आखिरकार ज़हर खा का आत्म हत्या करने का फैसला कर ही लिया | वजह बना एक दुसरे से बिछड़ने का गम | लिहाजा उन्होंने बिछड़ने से बेहतर मौत को गले लगाने का फैसला किया और जहर खा कर बिछड़ने से बेहतर जिन्दगी को ही ख़त्म करने का आसान रास्ता चुना | जिसमे प्रेमी को जिला अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया जबकि गंभीर हालात में भर्ती प्रेमिका का ईलाज चल रहा है |




आपको बताते चले की सम्मनपुर थानाक्षेत्र के सैदापुर सेहरी गाँव की रहने वाली प्रज्ञा (बदला नाम ) और इसी गाँव के रहने वाले उत्तम नाम के युवक के बीच काफी दिनों से प्रेम प्रसंग चल रहा था | लेकिन अभी कुछ दिन पहले प्रज्ञा के परिवार वालो ने उसकी शादी किसी और लड़के से तय कर दिया | ये बात प्रज्ञा ने अपने प्रेमी उत्तम से बता दिया| दोनों एक दूसरे के प्यार में इस कदर पागल थे कि दोनों ने एक-दूसरे की जुदाई बर्दास्त नहीं कर सकते थे | दोनों ने एक-दूजे के ऐसी दशा में एक न होने की स्थित को देख कर अपनी जान देने का फैसला कर लिया  और एक साथ मौत को गले लगाने के लिए ज़हर खा लिया | जिसकी सूचना मिलते ही दोनों के परिवार वालो ने बिना पुलिस को इसकी सूचना दिए ही उनको लेकर जिला अस्पताल पहुँच गये | जहाँ पर डॉक्टरों ने प्रेमी ( उत्तम ) को मृत घोषित कर दिया  जबकि गंभीर अवस्था में बे-सुध प्रेमिका प्रज्ञा जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही है और उसका ईलाज चल रहा है | यही तो इश्क है जो पागल , दीवाना , मस्ताना तो होता ही है अंधा भी होता है जिसे भविष्य के रास्ते दिखाई नहीं देते और दुनिया अपने ही इर्द गिर्द घूमती नजर आती है |

Report- Syed Shabi Abbas

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0 thoughts on “क्या यही प्यार है , प्रेमी ने प्रेमिका संग चुनी मौत

  • February 9, 2017 at 2:41 pm
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    Pyar karna aasan nahi mil kr bichadne k gam hardum rahta hai. Lekin samaj k jagruk logon ko pahal kar ish tarah ke dukhad ghatanaon ko rokne k liya kuch sarthak prayas karna chahiye. Pyar karna koi gunah nahi hota akhir yeh baaten kab samaj manega?

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