कुछ यूँ हाल है लाल तेरे छोड़ जाने के बाद, बलिया के शहीद के बारे में हर एक बात जरूर पढ़े

बलिया। सीमा सुरक्षा बल जम्मू के अरनिया सेक्टर में गुरुवार की रात पाक सैनिकों से लड़ते हुए बलिया जनपद के बांसडीह क्षेत्र अंतर्गत विधाभवन नारायणपुर निवासी बृजेन्द्र बहादुर सिंह ‘मंटू’ शहीद हो गया। उसे क्या पता था कि गुरुवार की रात उसके जिन्दगी की अंतिम रात है। वह अपने घर गुरुवार की रात 9 बजे फोन किये थे। मां राजकुमारी व पत्नी सुष्मिता से बात कर कुशलक्षेम पूछे। तब किसी को क्या पता था कि यह उनकी अंतिम बात हो रही है। शुक्रवार की सुबह पांच बजे शहीद जवान की यूनिट से सेना के अधिकारियों द्वारा सूचना मिलते ही कोहराम मच गया। शहीद की मां और पत्नी को विश्वास ही नहीं हो रहा था कि उनका बृजेन्द्र अब दुनिया में नहीं है। विद्याभवन नारायणपुर निवासी अशोक कुमार सिंह की तीन संतानों में दो पुत्रियां प्रीति व प्रियंका तथा एक पुत्र बिजेंद्र थे। शुरू से ही देश सेवा का जज्बा रखने वाले वृजेन्द्र वर्ष 2005 में सीमा सुरक्षा बल के 192वीं बटालियन में भर्ती हो गये। उन्हें दो माह पहले जोधपुर से तबादला होकर जम्मू के अरनिया सेक्टर में तैनाती मिली थी। गुरुवार की रात पाक द्वारा सीज फायर शुरू करने के बाद बार्डर पर तैनात भारतीय जवानों ने जबाबी कार्यवाही शुरू कर दिया। इसी बीच दुश्मन की गोली बिजेंद्र को लगी और वे शहीद हो गये। शुक्रवार को सीमा सुरक्षा बल के अधिकारियों ने फोन द्वारा उनके परिवार को सूचना दी।

2009 में परिणय सूत्र में बंधे थें बृजेन्द्र

ballia bijendra family

बिजेंद्र की शादी बलिया के मिड्ढ़ा निवासी हरिशंकर सिंह की पुत्री सुष्मिता से 2009 में हुई थी। बिजेंद्र के दो पुत्र है। बड़ा पुत्र भूपेंद्र 6 वर्ष का है, जबकि छोटा बेटा संतराज 3 वर्ष का। घर पर लगी भीड़ से बिचलित दोनो बच्चे पिता की मौत से अंजान थे। परिवार का रो-रो कर बुरा हाल था। गांव सहित आस-पास के क्षेत्रो में सन्नटा पसरा रहा। दुकाने और क्षेत्र के विद्यालय बन्द हो गए। तहसील के अधिवक्ता शहीद बिजेंद्र की शहादत पर कार्य से विरत रहे।

16 सितम्बर को पहुंचेगा शव

शहीद बृजेंद्र बहादुर का शव 16 सितम्बर को जम्मू से गांव पहुंचेगा। मां-बाप के इकलौता पुत्र बृजेन्द्र के साथी जवान दिल कुमार की माने तो बृजेन्द्र के रग-रग में देशभक्ति की भावना रची-बसी थी। दिल कुमार का गांव शहीद बृजेन्द्र के गांव नारायनपुर से सटा देल्हुवा है।

बोले पिता… बेटे की शहादत पर गर्व

सीमा सुरक्षा बल में तैनात शहीद बिजेंद्र के पिता अशोक सिंह का कहना है कि मुझे गर्व है कि देश के लिए मेरा बेटा शहीद हो गया। गम इस बात का है कि मुझे एक ही पुत्र था और भी रहते तो देश के लिए कुर्बान कर देता।

दो माह पहले छुट्टी बिताकर लौटे थे बृजेन्द्र, गांव में नहीं जले चूल्हें

अरनिया सेक्टर जम्मू में सीमा सुरक्षा बल में तैनात शहीद बृजेंद्र अंतिम बार दो महीने पहले घर से छुटी काटकर जोधपुर से जम्मू गए थे। तब किसी को क्या मालूम था कि यह अपने पैतृक गांव की शहीद की अंतिम यात्रा होगी। ऐसी चर्चा शहीद के घर उपस्थित लोगों के बीच होती रही। विद्याभवन नारायणपुर गांव बृजेंद्र की शहादत पर शोक में डूबा था। शुक्रवार को खबर मिलने पर हर जगह सन्नटा पसर गया। पूरे गांव में चूल्हे नही जले। सब लोग शहीद बृजेंद्र के घर पर मायूस बैठे थे।

Report- Radheyshyam Pathak

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